How were the stars born and their types / तारों का जन्म कैसे हुआ और उनके प्रकार/blogspot.com

How were the stars born  / तारों का जन्म कैसे हुआ 
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According to science 

            आसमान में टिमटिमाते तारे बचपन से ही हमारे दिल में राज करते हैं | हम में से हर व्यक्ति ने रात के समय अपने घरों की छत पर सोते समय इन तारों को देखने का आनंद लिया ही होगा और आप में से बहुत से व्यक्तियों के मन में एक सवाल जरूर उठता होगा आखिर “यह तारे बनते कैसे हैं"| तो चलिए जानते हैं, कि यह तारे बनते कैसे हैं | और साथ ही साथ हम आपको इनके प्रकार के बारे में भी बताएंगे की आखिर यह कितने प्रकार के होते हैं ,और इनकी अवधि कितने साल तक होती है | तो चलिए  शुरू करते है, हमारे वेबसाइट creativefact.blogspot.com के साथ |

1)  "तारों का जन्म कैसे हुआ" |
तारों का जन्म 'नेम्बुला' के अंदर होता है, जिसे हम निहारिका  के नाम से भी जानते हैं | यह निहारिका हाइड्रोजन हीलियम और धूलिय कण का एक धुआ रहता है ,यह गैस और धुलीय  कण आपस में टकराते हैं | जिस कारण इन धुओ से गैस  का एक गोल आकार बन जाता है | यह ज्यादा बड़े नहीं होते लेकिन यह गोले आपस में टकराते रहते हैं ,जिसके कारण यह आपस में चिपक कर एक बड़े से गोले  के समान हो जाते हैं |और बड़े होने के कारण इनका गुरुत्वाकर्षण अधिक होता है, जिसकी मदद से यह बाकी के गोलो को अपनी ओर खींच कर खुद में सम्मिलित कर लेते हैं, और इसी प्रकार निर्माण होता है| एक अविकसित तारे का जिसे प्रोटोस्टार (PROTOSTAR) कहा जाता है |
                      
यह प्रोटोस्टार जैसे - जैसे बडा होता जाता है वैसे - वैसे इसके अंदर का दबाव और तापमान भी बढ़ता जाता है | जिसके कारण हाइड्रोजन के परमाणु हीलियम के परमाणु बनाने लगते हैं, और इन्हीं परमाणु की वजह से बहुत ही अधिक मात्रा में ऊर्जा का निर्माण होता है | और यह ऊर्जा इतनी ज्यादा होती है, कि जिस कारण वह गोला एक प्रकाशीय पिंड की भली-भांति चमकने लगता है, और फिर पूर्ण रूप से तारे के रूप में तैयार हो जाता है, हमारे इस खूबसूरत से आकाश में जगमग- आने के लिए | 

2) “तारे कितने प्रकार के होते हैं" | 

 यह कुछ तारों के प्रकार है, जिसे आप ऊपर दिए गए तस्वीर में देख सकते हैं | यह सभी तारे हमारे सौरमंडल में पूर्ण रूप से फैले हुए हैं और अपनी रोशनी से इस पूरे ब्रह्मांड को जगमगाते रहते हैं | इनमें से blue giant stars ये हमारे सौरमंडल के सबसे बड़े तारे के रूप में जाने जाते हैं | और yellow dwarf stars  ये हमारे सौरमंडल के सबसे छोटे तारे के रूप में जाने जाते है |

3) "तारों की अवधि कितने साल तक होती है" 


 1) yellow dwarf star = 10 billion (10 अरब) 
         
 2) orange dwarf star = 15 to 45 billion              (15 से 45 रक्त आज तक) 
 3) red dwarf star = 100 billion (100 अरब              साल) 
4) browan dwarf star = 10 billion (10 अरब साल) 
5) blue giant star = 12 billion (12 अरब साल) 
6) red giant star = 1 million  (1 लाख साल) 
7) red super giant star = hunderd thousand years (100 हजार साल) 
8) white dwarf star = 50 million (50 लाख साल) 
9) black dwarf star = quadrillions (महाशंख साल)
10 ) Neutron star = 1 million (1 लाख साल) 
4) “तारे कैसे नष्ट होते हैं“ | 
तारों की मृत्यु तारों के द्रव्यमान (mass)पर निर्भर करता हैं।
एक तारे के पास जितना ज्यादा द्रव्यमान होता हैं उसके पास उतना ही मटेरियल होता हैं।लेकिन ज्यादा द्रव्यमान वाले तारे के (gravitational force)गुरुत्वाकर्षण बल के कारण उसके कोर का तापमान ज्यादा होता हैं।इसलिए उस तारे का मटेरियल जल्दी जल (burn) जाता हैं। 

उदाहरण = एक Red Dwarf तारा जो कि सूर्य के द्रव्यमान का लगभग 50% ही होता हैं,ब्रह्माण्ड में सबसे ज्यादा दिन तक जीवित रहने वाले तारो में से यह एक हैं। यह तारा हमारे ब्रह्मांंड में  सबसे ज्यादा समय तक जीवित रहता है |Red Dwarf Star  का द्रव्यमान अधिक होने के कारण और इसकी कोर का तापमान अधिक होने के कारण यह अपने मटेरियल को जल्दी जलने नहीं देता और लंबे समय तक टिका कर रखता है, और यह बाकी तारो के मुकाबले बहुत ही कम चमकता है | इसी कारण यह हमारे ब्रह्मांड का सबसे ज्यादा समय तक जीवित रहने वाला तारा है 

 न्यूट्रॉन तारा (Neturon star) 

मध्यम द्रव्यमान वाले तारे जो कि सूर्य से 8 से 20 गुना तक बड़े होते हैं।
इन तारों में fusion की क्रिया बंद होने के बाद जब इन तारो के कोर का द्रव्यमान 1.4 गुना सूर्य के द्रव्यमान के बराबर पहुच जाता हैं,
तब इसके कोर के अणु के अंदर electron और proton क्रिया करके neutron का एक सघन (dense) कोर बना लेते हैं।
और कोर के बाहर की लेयर सुपरनोवा धमाके के कारण बाहर अन्तरिक्ष में फैल जाता हैं।
और पीछे छोड़ जाता हैं लगभग 25 km के diameter का एक बेहद ही सघन (dense)गोला,यही गोला बन जाता हैं neutron star. ये neutron star अरबों साल तक उर्जा क्षय करने के बाद मर जाते हैं।

ब्लैक होल (black hole ) –

ज्यादा द्रव्यमान वाले तारे जो की सूर्य से 20 गुना या उससे ज्यादा बड़े होते हैं।
ये तारे जब अपने अंत पर होते हैं तब इनके कोर अपने ही अन्दर लगातार सिकुड़ते हुए ⚫black hole बना लेते हैं
इसमें बड़े तारे के कोर तारे जब सूर्य के द्रव्यमान से 1.4 गुना ज्यादा हो जाते हैं,
तब ये तारे सुपरनोवा धमाके के साथ ही अपने gravity के कारण लगातार सिकुड़ते हुए black hole बना लेते हैं।

जब तारे के केंद्र (core) में मौजूद सारा H2 खत्म हो जाता है तो फिर तारा सिकुड़ने लगता है यानी छोटा होने लगता है। तारे के सिकुड़ने से उसके अंदर का temperature धीरे-धीरे बढ़ने लगता है। तापमान में हुई इसी वृद्धि के कारण, तारे में बची-कुची H2 जलने लगती है और तारा एक बार फिर से जगमगाने लगता है।अब क्योंकि तारा जलता रहता है, इस कारण वह फैलना शुरू हो जाता है। तारे के बहुत ज़्यादा फैलने के कारण उसकी outer surface यानी बाहरी आवरण ठंडी होने लगती है। ठंडा होने के साथ ही साथ तारा अब जमने भी लगता है और इस तरह यह लाल रंग का एक बड़ा तारा बन जाता है, जिसे  red giant star कहते हैं. यह नाम इसे इसके Size & color के आधार पर दिया गया है।

Red Giant Stage में जाने के कुछ समय बाद तक तारा लगातार फैलता और सिकुड़ता रहता है। तारे के लगातार फैलते-सिकुड़ते रहने की इस अवस्था को 'पल्सर (Pulsar)' कहा जाता है। पल्सर अवस्था तक तो सभी तरह के तारे, चाहे वो हल्के हो या भारी, एक जैसा ही व्यवहार करते हैं, लेकिन इसके बाद अलग-अलग द्रव्यमान के तारे अलग-अलग व्यवहार दर्शाते हैं। यानी अलग-अलग द्रव्यमान(mass) वाले तारों की ending अलग-अलग तरह से होती है | यहि से सभी तारो कि समाप्ति शुरू हो जाती है |


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